बचपन से ही यदि छोटी हर्र को पीस करके शहद में लपेट कर, उसमें देशी गाय के घी को मिला कर चटाया जाये तो ऐसा कहा जाता है कि मरते समय तक बाल काले ही रहते हैं।
ध्यान दीजिएगा कि गाय देशी ही हो। अगर हो सके तो उसके घी को बनाने के लिए उसके दूध कि दही जमा कर उसको मथा जाये एवं जो नैनू निकले उसको गर्म करने से घी बनाया जाये।
जितना हर्र खुशी से बच्चा ले उतना ही दीजिएगा क्योंकि उससे जीभ कुछ देर के लिए बंध सी जाती है। बड़े लोग 2 हर्रे तक खाएं। शहद उतना हो जो उसे अच्छे से मिला दे। जितना शहद हो उसका आधा मात्र घी का हो।
